stress to poor students
जब शहरों में तैयारी के लिए कोई छात्र घर से पहली बार निकलता है तब उसके माता-पिता एक ही बात कहते है कि बेटा हमारे पास पैसा कम है मन से पढ़ना ।
शहरों में 10×10 का कमरा भी आज 3000 प्रति माह के हिसाब से मिलता है
दो टाइम के बजाय एक टाइम खाना बनता है ताकि इससे समय बचेगा।
आटा गर्मी में गूथते समय पसीना इस कदर बहता है मानो शरीर से नदी की धार निकल रही हो।
रोटियां बनाते बनाते जिंदगी रोटी जैसी हो जाती है ,जब गैस भराना होता है तो दोस्तो से या बगल वाले से उधार लेना पड़ता है । जिस दिन रूम का किराया देना पड़ता है उस दिन लगता है कि आज किसी ने कलेजा निकाल दिया है।घरवालों से बार बार पैसा मांगने में शर्म आती है।
शहरों के उन छोटे कमरों रहते रहते पढ़ाई करते करते सर का आधा बाल झड़ जाता है , चेहरे की रौनक चली जाती है ......माथे पर तनाव की लकीरें साफ दिखाई देने लगती है।
बहुत ही सँघर्ष और तप जैसी जिंदगी उन घुटन भरे कमरों में जीने के बाद जब कोई भर्ती आती है तब 1000 पद के लिए लाखों आवेदन आता है।
पढ़ने वाले के घर से फोन आता है कि बेटा इस भर्ती में अच्छे से पढ़ना........घर वालो की उम्मीदों के बोझ ने फिर से टेंशन दे दिया.......
फिर भी लाखों लोगों को पीछे धकेल के परीक्षा में पास होने की उम्मीद पर घर परिवार समाज और स्वयं को लगता है कि अब नौकरी मिल ही जाएगी
फिर बहुत समय तक परिणाम का इंतजार करते है कि अब ज्वैनिग होगी लेक़िन उसी बीच नया आदेश आता है कि भर्ती परीक्षा में धांधली, घोटालेबाजी के चलते परीक्षा रद्द हो सकती है।
क्या महसूस होता है उस छात्र को......कल्पना से परे है।
कई वर्षों तक पढ़ाई करने के बाद कोई भर्ती आती नही है एक भर्ती आ गयी पास भी हुआ अब उसमें भी धांधली ........... कहाँ तक न्यायोचित है.?
आज बेरोजगार लोग को देखते ही लोगो की भाषा और सामाजिक भावना बदल जाती है .......सम्मान नही मिलता है........ फिर भी समाज मे रहते हुए इन सब परिस्थितियों से लड़ता है।।
लोक लज्जा की स्थिति में खुद को पुनः खड़ा करता है तभी आकर कोई घोटालेबाज उसके सपने छीन ले जाता है...........✍️✍️✍️
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