कैसे बने भगवान विष्णु तिरुपति बालाजी?
एक बार समस्त देवताओं ने मिलकर एक यज्ञ करने का निश्चय किया। यज्ञ की तैयारी पूर्ण हो गयी। तभी वेद ने एक प्रश्न किया तो एक व्यवहारिक समस्या आ खड़ी हुई। ऋषि मुनियों द्वारा किए जाने वाले यज्ञ की हविष्य तो देवगण ग्रहण करते थे। लेकिन देवों (1/44) द्वारा किए गए यज्ञ की पहली आहूति किसकी होगी? यानी सर्वश्रेष्ठ देव का निर्धारण जरुरी था, जो फिर अन्य सभी देवों को यज्ञ भाग प्रदान करे। ब्रह्मा विष्णु महेश परम् आत्मा हैं। इनमें से श्रेष्ठ कौन है? इसका निर्णय आखिर हो तो कैसे? भृगु ने इसका दायित्व सम्भाला। वह देवों की (2/44) परीक्षा लेने चले। ऋषियों से विदा लेकर वह सर्व प्रथम अपने पिता ब्रह्मदेव के पास पहुँचे। ब्रह्मा जी की परीक्षा लेने के लिए भृगु ने उन्हें प्रणाम नहीं किया। इससे ब्रह्मा जी अत्यन्त कुपित हुए और उन्हें शिष्टता सिखाने का प्रयत्न किया। भृगु को गर्व था कि वह तो परीक्षक हैं, (3/44) परीक्षा लेने आए हैं। पिता पुत्र का आज क्या रिश्ता? भृगु ने ब्रह्म देव से अशिष्टता कर दी। ब्रह्मा जी का क्रोध बढ़ गया और अपना कमण्डल लेकर पुत्र को मारने भागे। भृगु किसी तरह वहाँ से जान बचाकर भाग चले आए। इ...